Rise For India

The Change Is Us

  • Home
  • Opinions
  • Rising Stories
  • Campaigns
  • Editor’s Pick
  • Contact Us
किसान की विधवा ने खेती से ही चमकायी अपनी किस्मत

किसान की विधवा ने खेती से ही चमकायी अपनी किस्मत

August 27, 2017 by

किसानों की हालत पहले ही गंभीर है। ऐसे में यदि घर के इकलौते कमानेवाले हाथ ही उखड जाए तो उस परिवार की महिला के हाल की कल्पना की जा सकती है। पूरा परिवार हाशिये पर आकर टूट-बिखर जाता है। ऐसे में फिर से घाटे का सौदा साबित हुई खेती की ओर मुडने का विचार ही मन को नहीं छूता।

परंतु चंद्रपुर तहसिल के घुग्घूस समिपस्थ वेंडली गांव की एक किसान की विधवा ने इस मिथक को तोड कर नयी मिसाल पेश की है। २० साल पहले ही गुजर चुके पति की खेती को उसने सोना उगलनेवाली बना दिया है।  नंदा पिंपलशेंडे इस परिसर के ही नहीं बल्की पूरे राज्य के किसानों के लिए प्रेरणा की मिसाल बनी है। उसने फिर से खेती के लिए कर्ज लेने की हिम्मत दिखाई। सिंचाई की सुविधा की और प्रयोग पर प्रयोग करती गयी। समय समय पर फसलों को बदला। तब जाकर कर्ज के बोझ तले दबी खेति-किसानी कर्जमुक्त होकर सोना उगलने लगी। आज विधवा किसान नंदा अपनी दो बेटियों को उच्च शिक्षा दे रही है। समाज में सम्मान के साथ जी रही है। आर्थिक रुपसे सक्षम होकर दूसरों को रोजगार भी दे रही है।

खाने के पडे थे लाले

२० साल पहले ही नंदा के पति का निधन हो गया। परिवार का आधार ही खो जाने से परिवार बिखर गया। खाने के लाले पडे। चार एकड जमिन का क्या करे, पैसा कहां से लाए, फिर से कर्ज कैसे ले, तब तक जीएं तो जीएं कैसे?  ऐसे कई सवाल थे। चंद्रपुर निवासी भाई सुरेश देहारकर ने तात्कालिक मदद दी। उससे थोडी हिम्मत आयी। बचेंगे तो और भी लडेंगे का जज्बा आया।

१२ साल की मेहनत

पति के देहांत के बाद संघर्ष का दौर शुरु हुआ। चार एकड खेती का टुकडा अपनी रोजी-रोटी बन सकता है, ऐसा विश्वास मन में आया। पति ने किया। मुझे भी करना है, यह भावना बढी। घर-गृहस्थी चलानी है, यह काम मुझे ही करना है ऐसा विचार हावी हुआ। इससे फिर खेती में ही प्रयोगों का दौर शुरु हुआ। भाई के सहयोग से पहले वर्ष खेती की। थोडी राहत मिली। परंतु घर चलाना है तो थोडा और चाहिए, यह नंदा के ध्यान में आया। उसने कर्ज लिया। खेत में सिंचाई की स्थायी व्यवस्था जुटाई। हर साल अलग अलग फसलें लेने की कोशिशें जारी रखी। इसे सफलता मिलती रही।

volunteer for an ngo - rise for india

बेटी बचाव, बेटी पढाओं

नंदा को दोनों बेटियां ही है। पति के देहांत पश्चात उनकी शिक्षा का मुद्दा अहम था। दोनों को अच्छी पढाई देने वह प्रतिबध्द थी। क्योंकि वह भी एक बेटी ही तो है, ऐसा ख्याल उसकी ममता को आया। मेहनत की। एक बेटी एम.कॉम तक पढी। दूसरी ने आईटीआई पूरा किया। जल्द शादी करा, बेटियों से मूक्त होने का छोटा विचार उसके मन में नहीं आया। उसने बेटियों को ही बेटा मान कर खूब पढाया।

करेले ने किया जादू

चंद्रपुर शहर से कुछ किमी दूरी पर वेंडली गांव की जमिन पानी पकड कर नहीं रखती। उसके अनुसार फसलों का नियोजन करना पडता है। नंदा ने जून महिने में एक अलग प्रयोग किया। दो एकड में करेले की फसल बो दी। बाकी क्षेत्र में कपास लगाया। करेले दो माह में ही  उभरकर आए। १५ दिनों में ११० क्विंटल करेले बाजार में भेजे। करेले चुनने नंदा ने जरुरतमंद महिलाओं को रोजगार भी दिया।

कपास की फसल भी फिलहाल अच्छी है।

आत्महत्या हल नहीं

संकट आते है। इससे डरना नहीं चाहिए। डर कर हार गए तो सब कुछ खत्म समझीए। सतत मेहनत व संघर्ष की तैयारी रखनी चाहिए। आत्महत्या कोई समाधान नहीं हो सकता। मैने निरंतर १२ साल संघर्ष किया। आज मै थोडी संतुष्ट हूं।

-नंदा पिंपलशेंडे

किसान महिला, वेंडली

Note: Rise For India is a citizen driven opinion based media website and the views expressed in the posts are solely that of the authors. If you disagree with the opinion expressed by the writer, please feel free to use our commenting system to start a constructive discussion about the same.

Comments

Also Read:

  1. एमएडी फैक्ट्री के माध्यम से कलाकार बना रहे अनिरुध्द वनकर
  2. A Teenager In A Short Dress On A Scooter And A Foreigner Were Harassed Because They Were ‘WEAK’
  3. ना ज्ञान, ना मैदान, फिर भी एथलेटिक्स में बनाई पहचान

About

Mukesh Walke is a name of social journalism.He believes in human interesting stories.Being a pure Marathi Manus he is serving Hindi Journalism since 13 years. He is Assistant Editor in Dainik Bhaskar. Also worked for Hindi Daily Lokmat Samachar at Yavatmal known for farmers suicides.Worked at Naxalite area Gadchiroli. Was editor at electronic media too.Author and translator of 3 books. Awardee writer Mukesh is known for his Social, wild life & environments positive journalism. He is himself Eco- friendly using bicycle since 35 years for office and other works.

Filed Under: Editor's Pick, Rising Stories, Society Tagged With: feminism, society, suicide, women

Categories

  • Business (16)
  • Campaigns (8)
  • Culture (66)
  • Editor's Pick (70)
  • Education (88)
  • Environment (11)
    • Nature (2)
  • News (181)
  • Opinions (151)
  • Politics (99)
  • Rising Stories (100)
  • Society (304)
  • Uncategorized (85)
writers

Trending this week

  • no hungry child campaign of Mr V Sridhar An Interview with the Man Who Feeds 21000 Hungry Children Everyday
  • 200 women stabbed a man in court The Day When 200 Women Stabbed A Man To Death Inside Court – How Justice Is Done When Injustice Takes Its Toll
  • community that hates marriage This Hindu Community Has The Perfect Answer To Every Possible Question Related To Dowry
  • justice for jisha Brutally Raped, Vagina Slashed And Intestines Pulled. Jisha’s Story In Kerala Which No One Knows!

Like Us On Facebook

  • About
  • Disclaimer
  • Copyright Policy
  • Contact Us

© 2026 · VDS Internet Media LLP