बाबासाहब आंबेडकर के विचारों से प्रभावित होकर सामाजिक प्रबोधन हेतू लोकगीतों से जनजागरण करनेवाले अनिरुध्द वनकर अब आम गायक या कलाकार नहीं रहे है। उन्होने फिल्मों में दस्तक दे दी है। कई लोकप्रिय एल्बम्स् उनके नाम है। कई लोकप्रिय गानों को उनके नाम से गुनगुनाया जाता है। झाडीपट्टी में उनकी अलग पहचान है। यहां के कलाकारों को तकनिकी और सभी दृष्टि से प्रशिक्षित कर बडी संख्या में उन्हे फिल्म, टिवी में मौका देना और झाडीपट्टी का परचम मुंबई तथा दिल्ली में लहराने का सपना संजोये कलाकार अनिरुध्द वनकर जल्द ही नये नाटक और फिल्म के जरिये चंद्रपुर और विदर्भ के दर्शकों तक पहुंचने वाले है।
कैसे शुरु हुआ सफर
कलाकार वनकर की पारिवारिक पृष्ठभूमि बेहद तंगहाली की रही। परंतु उनका गला उतना ही अमीर था। उनके गांव में शिक्षा के साथ आंबेडकरी आंदोलन का माहौल अच्छा रहा। यह उन्हे प्रभावित कर गया। नामांतर आंदोलन की लपटों ने उन्हे छू गयी। इसी से सामाजिक प्रबोधन हेतू अपने आवाज से लोकजागरन करने का मन उन्होने बनाया। उस समय आंदोलन का केंद्र चंद्रपुर था। उन्होने बाबूपेठ से एक गायक, नुक्कडनाटक और कलामंच संयोजक के रुप में शुरुआत की। शुरुआती दौर में ही उनका ‘माय’ नामक गीत बेहद मशहुर हो गया।
आर्थिक स्थिती सुधारने किये जलसे
प्रारंभीक दौर में आर्थिक स्थिती सुधार कर गुजारा करने के लिए उन्होने अपनी संस्था के माध्यम से विविध सरकारी योजनाओं के प्रचार-प्रसार का कार्य शुरु किया। इस माध्यम से उन्होने कई कलाकारों को जोडा। कला के कद्रदान मिले और कारवां बढता ही गया। जिले के साथ पूरे राज्य में उनकी मांग बढी। नाम हो गया और काम भी मिल गया।
झाडीपट्टी के नाटकों ने दी अलग पहचान
झाडीपट्टी का रंगमंच बडा ही मशहुर है। मुंबई-पुणे के स्टार यहां काम करने आते है। कलाकार वनकर ने अपनी आवाज को लेकर इसमें प्रवेश किया। अल्पसमय में ही वे मशहुर हुए। उनके गानों के एल्बम बनाने की मांग लोग करने लगे। फिर अभिनय का लोहा मनवाते हुए बेहतरीन कलाकार की पहचान कायम की।
नाना पाटेकर के साथ चमके
‘डा प्रकाश बाबा आमटे’ नामक मराठी फिल्म विगत वर्ष खूब चली थी। इसमे नाना पाटेकर मुख्य अभिनेता थे। जबकि अनिरुध्द वनकर को अहम ‘जगन’ नाम का किरदार मिला था। साथ ही उन्होने इसमें बतौर संगितकार भी काम किया और ‘तर्याच्या पारीवर कुत्रं मेलं’ यह गाना भी गाया। यहीं नहीं अनिरुध्द ने अपने साथ ३०-४० अन्य कलाकारों को भी इस फिल्म में मौका दिलाया।
बनाई सिरीयल, निर्देशन करेंगे
अनिरुध्द ने ‘दोन घास सुखाचे’ नामक टिवी सिरीयल बनाई है। वैसे स्वतंत्र निर्देशक के रुप में बडी फिल्म करने का उनका विचार है। ‘नामांतर’ आंदोलन पर फिल्म करने पर बात चल रही है। साथ ही मुरलीधर जाधव की विख्यात मराठी उपन्यास ‘कार्यकर्ता’पर नाटक या फिल्म बनाने पर विचार शुरु है। इस दृष्टि से उनके संस्थान ‘एमएडी फैक्ट्री’ का अहम योगदान रहेगा। वडसा में २० लाख की लागत से यह संस्था बनाई है। इसके माध्यम से कई बेरोजगारों और कलाकारों को काम देने का उनका संकल्प पूरा हुआ है। नि:शुल्क रुप से अभिनय तथा संगित का प्रशिक्षण देना और बाद में रोजगार देने का सिलसिला शुरु हो चुका है। विदर्भ राज्य बने और फिल्म इंडस्ट्री नागपुर में बने ऐसा उनका कहना है।
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